प्रशासनिक सेवा जनता की सेवा करने का मौका देती है -सुमित मलिक, भा. प्र. से., राज्य मुख्य सूचना आयुक्त और पूर्व मुख्य सचिव, महाराष्ट्र

नित्यानंद पांडेय/अंकिता मिश्रा
1982 बैच के एक आईएएस अधिकारी, सुमित मलिक का जन्म कोलकाता में हुआ। उनके पिता ने बंगाल प्रांत के मुख्य सचिव के रूप में काम किया था। इस कारण सुमित मलिक को आईएएस बनने की प्रेरणा मिली। राज्यपाल के कार्यालय और शिक्षा विभाग में विभिन्न शानदार कार्यों के बाद, मलिक ने अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में भी काम किया। प्रेसीडेंसी कॉलेज से स्नातक, सुमित मलिक ने आईआईएम से एमबीए और मास्टर डिग्री, अर्थशास्त्र विश्‍वविद्यालय, स्वाहिया से अर्थशास्त्र की शिक्षा ग्रहण की है। इसके साथ ही महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव के रूप में उन्होंने अपनी शानदार सेवा दी है। इसके लिए मलिक को आज भी याद किया जाता है। इस पद पर रहते हुए उनकी प्रमुख जिम्मेदारी राज्य सरकार की मशीनरी के दैनिक कामकाज की देखभाल करना और सरकार द्वारा लिए गए निर्णयों को कारगर तीरके से लागू करना था। वर्तमान में वे राज्य मुख्य सूचना आयुक्त, महाराष्ट्र के पद पर कार्यरत हैं।
इंडिया अनबाऊंड के समूह संपादक नित्यानंद पांडेय से एक विशेष साक्षात्कार में सुमित मलिक ने अपनी अबतक की सेवा, अनुभव और उपलब्धियों के बारे में खुलकर बात की। साथ ही वर्तमान पद की अपनी जिम्मेदारियों के बारे में भी उन्होंने विस्तार से जानकारी दी। पेश हैं मुख्य अंश।


सवाल : कृपया अपने बचपन, पारिवारिक पृष्ठभूमि और औपचारिक शिक्षा से हमारे पाठकों को अवगत कराएं?
जवाब : मैं मूल रूप से एक बंगाली परिवार से हूं।मेरा जन्म कोलकाता में हुआ। मैंने सिविल सेवा में प्रवेश किया, क्योंकि मेरे पिता भी सिविल सेवा में थे। वे अंग्रेजों के समय पहले आईएएस थे। मेरे पिता बंगाल प्रांत के एक मुख्य सचिव थे। मैं उनसे बहुत प्रेरित था और मैंने सिविल सेवा परीक्षा में बैठने का फैसला किया, जिसमें मेरा चयन हो गया। अपने पिता से मिली प्रेरणा की वजह से मैं आज यहां हूं।
सवाल : क्या आपके पिता का सपना आपको आईएएस अधिकारी के रूप में देखना था?
जवाब : बिल्कुल नहीं, यह मेरा सपना था। उन्होंने किसी विशेष क्षेत्र के लिए मुझ पर कभी कोई दबाव नहीं डाला। मैंने खुद सोचा कि मैं आईएएस बनकर समाज की सेवा कर सकता हूं। क्योंकि सिविल सेवा देश और जनता की सेवा करने का बहुत अच्छा अवसर प्रदान करती है।
सवाल : आपकी 1982 आईएएस बैच की यादें क्या हैं?
जवाब : आईएएस 1982 बैच की यादें काफी शानदार और यादगार हैं। वह 145 आईएएस का बड़ा ग्रुप था। हम आज भी एक दूसरे से जुड़े हैं। हम सोशल मीडिया के माध्यम से संपर्क में रहते हैं। साथ ही एक-दूसरे के जन्मदिन और शादी आदि की सालगिरह भी मनाते हैं।
सवाल : आपने अतिरिक्त मुख्य सचिव और मुख्य प्रोटोकॉल अधिकारी के रूप में काम किया है, कृपया अपना अनुभव साझा करें?
जवाब : मेरा मूल काम मुंबई में राजनयिक समुदाय की देखभाल करना था। दिल्ली के बाद, मुंबई में राजनयिकों की सबसे बड़ी संख्या है। यहां लगभग 120 देशों के प्रतिनिधि रहते हैं, मुझे उनसे संबंधित मुद्दों, राष्ट्रीय दिनों और कार्यों को देखना पड़ता था। मुंबई में बड़ी संख्या में विदेशी वीआईपी और प्रतिनिधिमंडल भी आते हैं। यह भी मेरे काम का एक हिस्सा था। अंतर्राष्ट्रीय संबंध का मुख्य भाग, व्यापार, वाणिज्य और निवेश का केंद्र भी मुंबई है; मेरा काम ये सब भी देखना था। मेरी कोशिश होती थी कि महाराष्ट्र में निवेश के लिए जितना संभव हो उतना निवेश लाया जाए। यह जिम्मेदारी निभाने का मुझे बहुत ही अच्छा अनुभव रहा।
सवाल : आपने महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव के रूप में कार्य किया है, कृपया अपने अनुभव बताएं?
जवाब : यह बहुत चुनौतीपूर्ण काम था। व्यापार रैंकिंग सुधार को लेकर उस समय माननीय प्रधानमंत्री जी बहुत चिंतित थे। उन दिनों हम 180 देशों में 150 में स्थान पर थे जो बहुत खराब रैंकिंग थी। मैं माननीय प्रधानमंत्री को धन्यवाद देना चाहता हूं। उनके प्रयास और सहयोग से हम तेजी से इसमें सुधार की ओर बढ़े। उनके और उनकी टीम के प्रयासों, निरंतर बैठकों और स्टार्ट अप के बाद हम पहले वर्ष में 150 से 100 की रैंकिंग में सुधार करने में सफल रहे और दूसरे वर्ष में हम 100 से 77 रैंक पर आने में सफल रहे। यह हमारे लिए बड़ी सफलता थी। दूसरी बुनियादी ढांचा थीं जिसमें नवी मुंबई हवाई अड्डे और अन्य कामों को करने के लिए सरकार द्वारा पहल की गई थीं क्योंकि वर्तमान मुंबई हवाई अड्डा पर बोझ और बढ़ाया नहीं जा सकता। इसलिए हमें नवी मुंबई हवाई अड्डे का क्रियान्वयन जल्दी करना था, ताकि उस परियोजना पर जल्द काम शुरू हो सके। हमारी कोशिश से दिसंबर 2019 तक नवी मुंबई एयर पोर्ट का परिचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद बंदरगाह शुरू करने के लिए खाड़ी पर 22 किलोमीटर पुल के निर्माण का काम था। उस दिशा में भी हम तेजी से आगे बढ़े और पुल निर्माण का काम शुरू हुआ। इसके साथ ही मेट्रो की सभी लाइनों के लिए जमीन, परमिट आदि उपलब्ध कराना सुनिश्‍चित करना था। नागपुर और मुंबई के बीच सुपर एक्सप्रेस वे बनाने की मुख्यमंत्री की दूरदर्शी परियोजना पर काम करना था, ताकि इन्फ्रास्ट्रकचर्स की दिशा में तेजी से काम को आगे बढ़ाया जा सके। उस दिशा में भी हमने काम प्रारंभ कराया। केंद्र सरकार ने महाराष्ट्र को खुले में शौच मुक्त बनाने का जो लक्ष्य रखा था, वह भी हमने हासिल किया। इसके अलावा हमें सामाजिक क्षेत्र पर भी ध्यान देना पड़ता था। हम प्राथमिक शिक्षा पर बहुत पैसा लगभग 40 हज़ार करोड़ रुपये खर्च करते थे। यह किसी भी विभाग का अब तक का सबसे बड़ा बजट था लेकिन इसका परिणाम अच्छा नहीं था। शिक्षा की गुणवत्ता हमेशा एक समस्या थी। हमने इसकी जवाबदेही शिक्षकों को सौंप दी और उन्हें यह सुनिश्‍चित करने की जिम्मेदारी दी कि बच्चे पढ़ रहे हैं या नहीं। शिक्षक को बच्चों की पढ़ाई की जवाबदेही सौंपकर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए हमने कदम उठाए। हमने अब शिक्षकों और पर्यवेक्षक को सूचित किया है कि एक बच्चे का खराब प्रदर्शन है तो इसके लिए भी उन्हें दोषी ठहराया जाएगा।
सवाल : कृपया अपने करियर के दौरान अपनी विभिन्न पोस्टिंग के बारे में बताएं?
जवाब : मेरी पहली पोस्टिंग गढ़चिरौली नक्सल प्रभावित जिले में हुई। मैं 1984 में उत्तरी गढ़चिरौली में सब डिविजनल ऑफिसर था और उस समय उत्तर गढ़चिरौली में बड़ी नक्सली समस्या नहीं थी, ज्यादा समस्या दक्षिण गढ़चिरोली में थी। एक अर्ध नक्सल प्रभावित क्षेत्र में काम करने का एक दिलचस्प अनुभव था। 2-3 पोस्टिंग के बाद मुझे चंदा से बांदा स्थानांतरित कर दिया गया। चंदा महाराष्ट्र का सबसे पूर्वी हिस्सा है और बांदा महाराष्ट्र का सबसे पश्‍चिमी हिस्सा है जो गोवा की सीमा से जुड़ा है। मैं जिला परिषद का मुख्य कार्यकारी अधिकारी था, वहां भी मुझे बहुत अद्भुत अनुभव हुआ। उसके बाद मुझे मुंबई स्थानांतरित कर दिया गया। यहां मैंने अतिरिक्त जिलाधिकारी के रूप में काम किया। उसके बाद मेरा स्थानांतरण सांगली में जिलाधिकारी के पद पर कर दिया गया। वहां हमने साक्षरता कार्यक्रम जैसे कई कार्यक्रमों को सफल बनाया, जिसमें वयस्कों को भी पढ़ना-लिखना सिखाया गया। इसके लिए सांगली को देश का सर्वश्रेष्ठ जिला होने के लिए स्वर्ण पदक मिला। बाबरी मस्जिद ढहाने के बाद भड़के साम्प्रदायिक दंगों के दौरान भी हम सांगली में शांति बनाए रखने में कामयाब रहे। उसके बाद लातूर में भूकंप आया, मैं लातूर के भूकंप के सभी पीड़ितों के पुनर्वास के लिए विश्‍व बैंक की टीम का हिस्सा था। उसके बाद मैंने महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव के कार्यालय में डेढ़ साल तक काम किया और फिर डिवीजनल कमिश्‍नर अमरावती के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया, चूंकि अमरावती आदिवासी बहुल क्षेत्र है, इसलिए हमने बहुत सारी पहल की। बच्चों में कुपोषण जैसी समस्याएं वहां अधिक थीं। मेलघाट में हमें वन क्षेत्र के बाहर के सभी गांवों को फिर से बसाना पड़ा। वहां हमने साक्षरता कार्यक्रम भी शुरू किया साथ ही स्कूल में पढ़ने वाले बच्चों की अन्य योजनाएं भी शुरू की। उसके बाद राज्यपाल एच.ई. मोहम्मद फजल के सचिव के पद पर मेरा ट्रांसफर किया गया। इस पद पर रहते हुए मैंने जेल के लिए और वन विभाग के लिए भी कई सुधार किए। उसके बाद मुझे शिक्षा सचिव के रुप में स्थानांतरित किया गया। वहां मैंने शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने की कोशिश की। वहां से मुझे प्रोटोकॉल और मुख्य सचिव के पद पर स्थानांतरित किया गया।
सवाल : महाराष्ट्र को बदलने और मुंबई को अपग्रेड करने के लिए राज्य में कई मेगा परियोजनाएं और मेट्रो कार्य चल रहे हैं कृपया भविष्य के इसके प्रभाव के बारे में बताएं?
जवाब : तीन साल बाद मुंबई पूरी तरह बदल जाएगी। अभी मुंबई में खासकर मेट्रोवाले एरिया में काफी गंदगी है क्योंकि मेट्रो रूट्स पर बहुत सारे खुदाई कार्य चल रहे हैं। अधिकांश मेट्रो 3-3 और डेढ़ साल बाद काम करना शुरू कर देगा। इससे यातायात में भीड़ कम होगी साथ ही प्रदूषण भी कम होगा और आवागमन बहुत आसान हो जाएगा। आवास के लिए एक बड़े विस्तार की गुंजाइश है क्योंकि 22 किमी का पुल हम खाड़ी पर बना रहे हैं। इसका मतलब है कि 20 मिनट के भीतर आप अपने गंतव्य तक पहुंच सकते हैं। और इस विस्तार में बहुत सारी भूमि उपलब्ध है, इसलिए बहुत-सी आवासीय परियोजनाएं आएंगी और इससे आवास की लागत कम होगी तथा यह किफायती आवास योजना को सफल बनाना बहुत आसान होगा।
सवाल : नोटबंदी, जीएसटी के बाद बेरोजगारी में वृद्धि हुई है, सरकार को अधिक रोजगार पैदा करने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?
जवाब : हम जीडीपी दर में वृद्धि के लिए काम कर रहे हैं। जीडीपी विकास दर में 1% की वृद्धि हुई है। लगभग 15 मिलियन नौकरियां पैदा हुई हैं। उसके लिए हमें श्रम सुधारों, बुनियादी ढांचे के विकास जैसे और सुधारों के लिए काम करना होगा। ग्रामीण इलाकों में बहुत संकट हैं। महाराष्ट्र में लगभग 50% जनसंख्या कृषि पर निर्भर करती है लेकिन कृषि सकल घरेलू उत्पाद का केवल 12% उत्पन्न करती है, जिसका अर्थ है कि उन सभी लोगों को सेवा और उद्योग क्षेत्र में स्थानांतरित किया जाना जरुरी है। बदले में उन क्षेत्रों को तेजी से आगे बढ़ाना है, जिसके लिए हमें बहुत अधिक निवेश आकर्षित करना होगा। व्यापार करने में आसानी सभी निवेशों को आकर्षित करने का एक विशेष पहलू है। हम यह सुनिश्‍चित करना चाहते हैं कि अर्थव्यवस्था तेजी से बढ़े, हम अधिक निवेश आकर्षित कर सकें, हमें यह सुनिश्‍चित करना होगा कि उद्योग और सेवा क्षेत्र भी तेजी से बढ़ें, इन सभी चीजों की आवश्यकता है।
सवाल : महाराष्ट्र ने केंद्रीय सूचना अधिनियम से पहले 2002 में सूचना का अधिकार कानून पेश किया, तब से सार्वजनिक प्राधिकरण के कामकाज पर क्या अंतर और प्रभाव पड़ा है?
जवाब : 2005 के बाद, आरटीआई का बहुत बड़ा प्रभाव है क्योंकि अब सरकार को पता है कि इसे पूरी व्यवस्था को पारदर्शिता से संचालित किया जाना है और फाइलों में जो कुछ भी है, वह सार्वजनिक डोमेन में आ सकता है। ये बातें अपने आप हर एक को जवाबदेह बनाती है। सार्वजनिक प्राधिकरण निर्णय लेने में अधिक सावधानी बरतते हैं और वे नियम तथा कानून के अनुसार काम करते हैं। इसका बहुत ही अच्छा असर पड़ा है। अब जिनको जानकारी चाहिए, उनको इससे वंचित नहीं रखा जा सकता।
सवाल : क्या भारत में आरटीआई अधिनियम परिवर्तन लाने में सक्षम है और इस बात से फर्क पड़ता है कि सूचना अधिनियम की स्वतंत्रता ने विदेशों में क्या योगदान दिया है?
जवाब : मुझे लगता है कि यह अधिनियम परिवर्तन लाने में सक्षम है।
सवाल : क्या आप आरटीआई अधिनियम को नागरिकों के अनुकूल बनाने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में विस्तार बता सकते हैं?
जवाब : यह संपूर्ण अधिनियम नागरिकों के हित में कार्य करता है क्योंकि अधिकांश अधिनियम नियमों, विनियमों और कानूनों के आधार पर बने हैं जो मूल रूप से नागरिकों को नियंत्रित करने के लिए हैं लेकिन यह अधिनियम वास्तव में नागरिकों के लिए है। इसे अधिक अनुकूल बनाने के लिए हम आरटीआई कार्यकर्ताओं के माध्यम से, विभिन्न एनजीओ के माध्यम से जनता को शिक्षित करने और आरटीआई के आवेदन और अपीलों को भरने में जनता की मदद कर रहे हैं, साथ ही हम सब कुछ ऑनलाइन करने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि आरटीआई आवेदक को कार्यालय आने की जरूरत न पड़े। सरकार द्वारा आरटीआई से संबंधित सभी जानकारी वेबसाइट पर ऑनलाइन कर दी गई है। यह प्रक्रिया जारी रहेगी। सभी जानकारी वेबसाइट पर उपलब्ध होगी, जिससे आरटीआई के मामलों में आवेदन करने वाले लोगों को सुविधा होगी और कार्यालय में अनावश्क भीड़ भी नहीं होगी।
सवाल : वर्तमान सीएस और राज्य के आगामी सीएस के लिए आपके सुझाव और सलाह क्या हैं?
जवाब : कुछ नीतियों और योजनाओं को स्क्रैप किया जाना चाहिए और कुछ नई नीतियों को लागू किया जाना चाहिए। ये ऐसी नीतियां हो सकती हैं, जो जनता पर प्रत्यक्ष प्रभाव डाल सकते हैं। कानूनों के बारे में मेरी राय है कि कुछ कानून का नकारात्मक प्रभाव पड़ रहा है। उसे बदलने की जरुरत है। देश में बहुत से ऐसे कानून भी हैं, जो वक्त के हिसाब से पुराने और बेकार पड़ गए हैं। उन्हें भी या तो स्क्रैप करना होगा, या उसमें बदलाव कर आज के हिसाब से उपयोगी बनाना होगा।
सवाल : मुख्य सूचना आयुक्त के रूप में आप किन चुनौतियों का सामना कर रहे हैं?
जवाब : अभी सबसे बड़ी चुनौती लंबित मामलों की संख्या को कम करना है क्योंकि बैकलॉग काफी हो गया है। पूरे राज्य के लिए वर्तमान में बैकलॉग लगभग 40 हजार है और यदि इसकी जानकारी देने में देरी हो रही है तो अधिनियम के उद्देश्य पूरे नहीं हो रहे हैं। मैं यह सोच रहा हूं कि मामलों की संख्या में कमी कैसे की जाए। आशा है कि इसमें हम बहुत जल्द सफल होंगे।
सवाल: आरटीआई अधिनियम के दुरुपयोग के बारे में कई शिकायतें मिली हैं। आप उस पर अंकुश लगाने के बारे में सोच रहे हैं?
जवाब : कुछ ऐसी घटनाएं हैं, जिनमें आरटीआई का दुरुपयोग किया गया है। मुझे संसाधनों की संख्या से फीड बैक मिलता है और मेरी नजर उन लोगों पर है, जो इसका दुरुपयोग कर रहे हैं। वे मेरे रडार पर हैं।
सवाल : सरकार, राज्य और केंद्र से आपकी क्या अपेक्षाएं हैं?
जवाब : हम सभी एक ही लक्ष्य के लिए काम करते हैं। हमें एक-दूसरे के काम में सहयोग करना चाहिए ताकि हमारी अर्थव्यवस्था विकसित हो, प्रति व्यक्ति आय, जीडीपी, साक्षरता दर बढ़े।
सवाल : आप महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस की कार्यशैली से कितने संतुष्ट हैं?
जवाब : वह काफी सक्रिय व्यक्ति हैं। मुझे उनके साथ काम करने का बहुत अच्छा मौका मिला। इसलिए उनके बारे में मैं अच्छी तरह सारी बाते जानता हूं। उनकी प्रबंधन क्षमता से मैं काफी प्रभावित हूं।
सवाल : क्या आपने कभी अपने काम में किसी राजनीतिक दबाव का अनुभव किया है?
जवाब : मैंने राजनेताओं के साथ हमेशा सम्मान का संबंध रखा है। राजनीतिक दबाव हमेशा बना रहता है क्योंकि वे खुद भी दबाव में होते हैं। यह हमारे कार्य का एक अंग है।
सवाल : आपका रोल मॉडल कौन है?
जवाब : कई ऐसे लोग हैं जो मुझे कई तरह से प्रेरित करते हैं। मैं किसी एक नाम के बारे में नहीं सोच सकता।
सवाल : आप फुर्सत का समय कैसे बिताते हैं?
जवाब : मैं लेखक हूं, मैं किताबें लिखता हूं।
सवाल : आप कौन-से खेल पसंद करते हैं?
जवाब : जब भी संभव होता है, मैं टहलने जाता हूं।
सवाल : आप उन छात्रों को क्या सुझाव, सलाह देना चाहते हैं जो आपके जैसे आईएएस बनने की ख्वाहिश रखते हैं?
जवाब : यह एक बहुत ही कंपिटेटिव परीक्षा है। इस के लिए उन्हें काफी मेहनत से अध्ययन करना चाहिए और पहले से ही इसकी तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। आश्‍वस्त रहें, अपने सामान्य ज्ञान में सुधार करें और हमेशा फोकस रहें।
सवाल : प्रशासनिक सेवा में काम करनेवाले आईएएस अधिकारियों के लिए कोई संदेश?
जवाब : आप जनता के सेवक हैं। आपको एक जनसेवक की तरह ही व्यवहार करना चाहिए। यह बात उन्हें हमेशा याद रखना चाहिए कि वे जनता की सेवा करने के लिए हैं। उनका रवैया जनता के प्रति विनम्र और जिम्मेदारीपूर्ण होना चाहिए।

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