आईपीएस की ड्यूटी फिल्मी कहानियों से अधिक चुनौतीपूर्ण, खतरनाक और रोमांचक भी -निशीथ मिश्रा, आईपीएस, अतिरिक्त पुलिस आयुक्त, संरक्षण व सुरक्षा

नित्यानंद पांडेय/अंकिता मिश्रा
2004 बैच के आईपीएस अधिकारी, निशीथ मिश्रा का जन्म और पालन-पोषन दिल्ली में हुआ। इंजीनियरिंग की डिग्री लेने के बाद उन्होंने केमिकल प्लांट्स में दो साल काम किया। वहीं उन्हें अपने सहयोगी से सिविल सर्विस में जाने की प्रेरणा मिली। पुणे, अमरावती, सीबीआई, एंटी करप्शन ब्यूरो दिल्ली, नागपुर और भोपाल में कई महत्वपूर्ण पदों पर प्रभावशाली ढंग से काम करने के बाद वे वर्तमान में अतिरिक्त आयुक्त,पी एंड एस के पद पर कार्यरत हैं।
इंडिया अनबाऊंड मिडिया हाउस के समूह संपादक नित्यानंद पांडे के साथ एक विशेष साक्षात्कार में निशीथ मिश्रा ने अब तक की अपनी विभिन्न पोस्टिंग पर प्राप्त अपने अनुभव, जिम्मेदारियों और चुनौतियों पर प्रकाश डाला। साथ ही उन्होंने वर्तमान पद के कार्यों और चुनौतियों को भी साझा किया। पेश हैं साक्षात्कार के मुख्य अंशः


सवाल : आपका जन्म और पालन-पोषण कहां हुआ और बचपन कहां बीता?
जवाब : बचपन का हर दिन बहुत ही सारगर्भित होता है, जिसे शब्दों में वर्णित नहीं किया जा सकता। मेरा जन्म दिल्ली में वर्ष 1976 में हुआ। मेरी शिक्षा दिल्ली में ही मदर्स इंटरनेशनल स्कूल में हुई । टेक्सटाइल्स इंजिनियरिंग पूरी करने के बाद मैंने गुजरात में एक केमिकल प्लांट्स में दो साल तक नौकरी की। उसके बाद मैंने पंजाब का रुख किया। इसके बाद मैंने अपने अनुभवों से सोचा कि सिविल सर्विस में आकर मैं समाज के हित में अधिक सार्थक योगदान दे सकता हूं, इसलिए मैंने इसकी तैयारी शुरू कर दी और यही कारण है कि आज मैं यहां हूं।
सवाल : क्या बचपन से ही आईपीएस अधिकारी बनना आपका सपना था?
जवाब : सच कहूं तो ऐसा नहीं था। मैं पत्रकार बनना चाहता था। लेकिन निजी क्षेत्रों में मील मजदूर आंदोलन से जुड़ने के बाद मैंने महसूस किया कि जिन लोगों की आवाज को अनसुनी कर दी जाती है और जिनकी लड़ाई लड़ने के लिए मुश्किल से कोई तैयार होता है, ऐसे लोगों के लिए सिविल सर्विस में आकर काफी कुछ किया जा सकता है।
सवाल : 2004 बैच की आपकी यादें कैसी हैं? क्या आप अभी भी अपने बैचमेट से मिलते हैं?
जवाब : मैंने अपनी प्रतिनियुक्ति के दौरान दिल्ली में भी काम किया है। दिल्ली एक ऐसी जगह है, जहां हमें हमेशा अपने कई बैचमेट से मिलने का अवसर मिलता है, तो वहां मेरी मुलाकात कई बैचमेट से हुई। मैं प्रशिक्षण आदि के लिए पिछले 15 साल से अपने कई बैच के अधिकारियों से लगातार संपर्क में रहता हूं।
सवाल : कृपया अपनी अब तक की विभिन्न पोस्टिंग के बारे में बताएं?
जवाब : एक पुलिस अधिकारी के रूप में पुणे ग्रामीण से मैंने अपन करियर की शुरुआत की। वहां से मैंने अपना प्रोबेशन पीरियड शुरू किया। वहां मुझे अपने प्रशिक्षण के दौरान पुलिस अधीक्षक विश्‍वास नागरे पाटिल के साथ काम करने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उसके बाद मैं अमरावती में तैनात था जहां मैंने सहायक पुलिस अधीक्षक के पद पर काम किया। वहां मुझे पुलिस अधीक्षक कृष्णप्रकाश के साथ काम करने और उनसे बहुत कुछ सीखने को मिला। उसके बाद मुझे कुछ समय के लिए वर्धा में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के पद पर स्थानांतरित कर दिया गया। उसके बाद मैंने एंटी नक्सली ऑपरेशन एंड स्पेशल एक्शन ग्रुप (एसएजी) के एसपी के रूप में पदभार संभाला। इस पद पर मैंने करीब एक साल काम किया। फिर एसपी भंडारा, उसके बाद डीसीपी, नागपुर, एसपी एंटी करप्शन, नागपुर के पद पर काम किया। 2014 में मुझे उइख एंटी करप्शन ब्यूरो, दिल्ली में स्थानांतरित कर दिया गया। वहां मैं एसआईटी का हिस्सा था, जो व्यापम घोटाले की जांच के लिए बनाई गई थी। इसके लिए मैं एक साल तक भोपाल में था। उसके बाद मैं फिर से दिल्ली आ गया। मैं सीबीआई के भ्रष्टाचार निरोधक मुख्यालय में कार्यरत था।
सवाल : कृपया संक्षेप में बताएं कि व्यापम घोटाला क्या है?
जवाब : मध्य प्रदेश व्यावसायिक परीक्षा बोर्ड (एमपीपीईबी) को हिंदी में व्यापम (व्यावसायिक परीक्षा मंडल) के नाम से जाना जाता है। यह एक स्व-वित्तपोषित और स्वायत्त निकाय है, जिसे राज्य में कई प्रवेश परीक्षाओं को आयोजित करने के लिए जिम्मेदारी सौंपी गई है। ये परीक्षा सरकारी नौकरियों और राज्य के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश के लिए आयोजित की जाती है। इस घोटाले में अवांछनीय उम्मीदवारों की मिलीभगत थी, जिन्होंने राजनेताओं और एमपीपीईबी अधिकारियों को बिचौलियों के माध्यम से रिश्‍वत देकर इन प्रवेश परीक्षाओं में हाई रैंक दिलाया था। इस घोटाले में शामिल कई व्यक्तियों की ’अप्राकृतिक’ मौतें हुईं, हालांकि अनौपचारिक आंकड़े 100 से अधिक हैं। इसमें मध्य प्रदेश के पूर्व राज्यपाल के बेटे की सड़क दुर्घटना में हुई मौत भी शामिल है। इन प्रवेश परीक्षाओं में अनियमितता के मामले का खुलासा 1990 के दशक के मध्य में हुआ था और पहली प्राथमिकी (एफआईआर) 2000 में दर्ज की गई थी। 2009 तक इसे संगठित अपराध का हिस्सा नहीं माना जा रहा था। जब 2009 में प्री-मेडिकल टेस्ट (पीएमटी) में बड़ी शिकायतें सामने आईं, तो राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक समिति की स्थापना की। समिति ने 2011 में अपनी रिपोर्ट पेश की और सौ से अधिक लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया। हालांकि, किसी भी अभियुक्त को दोषी नहीं ठहराया गया है। उनमें से ज्यादातर या तो संदिग्ध रूप से हिरासत में मारे गए या जमानत पर रिहा हुए। राज्य पुलिस की विभिन्न शहर इकाइयों द्वारा अनियमितताओं की प्रारंभिक जांच की गई। 2009-11 के दौरान, राज्य सरकार द्वारा स्थापित एक समिति और चिकित्सा शिक्षा के राज्य संयुक्त निदेशक की अध्यक्षता में, पीएमजी परीक्षा में अनियमितताओं की जांच की गई। इस घोटाले में संगठित अपराध रैकेट और राजनेताओं की भूमिका सामने आने के बाद, राज्य सरकार ने इस घोटाले की जांच के लिए 26 अगस्त 2013 को पुलिस का एक विशेष कार्यबल (एसटीएफ) गठित किया। प्रमुख विपक्षी कांग्रेस पार्टी के सदस्यों सहित कई कार्यकर्ताओं और राजनेताओं ने भारत के सर्वोच्च न्यायालय की निगरानी में घोटाले की सीबीआई जांच की मांग की। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शुरू में सीबीआई जांच के सुझाव का मनोरंजन नहीं किया। 5 नवंबर 2014 को, मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने सीबीआई जांच के लिए कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह की याचिका को भी खारिज कर दिया और इसके बजाय एक विशेष जांच दल (एसआईटी) की स्थापना की, जो अदालत के मार्गदर्शन में जांच करे। यह एसआईटी मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति चंद्रेश भूषण की तीन सदस्यीय टीम है। 2014-2015 के दौरान, इस घोटाले की जांच एसटीएफ ने एसआईटी की निगरानी में की। 7 जुलाई 2015 को, कथित रूप से संदिग्ध मौतों की बढ़ती संख्या के विवाद के बाद, एम पी के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को सूचित किया कि वह इस घोटाले की सीबीआई जांच का आदेश देने के लिए मध्य प्रदेश के उच्च न्यायालय को लिखेंगे। उसी दिन, विपक्षी राष्ट्रीय कांग्रेस पार्टी ने घोटाले की निष्पक्ष जांच की अनुमति देने के लिए चौहान से इस्तीफे से मांग की। इसके बाद केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) को जांच स्थानांतरित करने के लिए उच्च न्यायालय के समक्ष आवेदन दायर किया गया था, जिसने इसी तरह के आवेदनों पर उच्चतम न्यायालय के फैसले का इंतजार करने का आदेश दिया था। 9 जुलाई 2015 को, भारत के अटॉर्नी जनरल ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि मध्य प्रदेश राज्य को सीबीआई को जांच स्थानांतरित करने में कोई आपत्ति नहीं है, जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने घोटाले से संबंधित आपराधिक मामलों और इससे संबंधित कथित तौर पर हुई मौतों की जांच को स्थानांतरित करने का आदेश दिया।
सवाल : क्या आईपीएस अधिकारियों को फिल्मों में चित्रित किए जा रहे हालात के समान परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है?
जवाब : मैंने केवल गंगाजल और सरफरोश फिल्म देखी है, लेकिन उस समय मैं पुलिस में नहीं था, इसलिए मुझे इसकी प्रामाणिकता के बारे में ज्यादा जानकारी नहीं है। लेकिन मुझे लगता है कि आईपीएस की जिम्मेदारी फिल्मों में दिखाए जानेवाली घटनाओं से ज्यादा चुनौतीपूर्ण और रोमांचक है।
सवाल : कृपया अपनी वर्तमान पोस्टिंग पुलिस आयुक्त पीए एंड एस के बारे में बताएं?
जवाब : मैंने 30 जुलाई 2018 को पी एंड एस के अतिरिक्त आयुक्त का पदभार संभाला है। लगभग 8 महीने से इस पद पर कार्यरत हूं। पी एंड एस के मुख्य रुप से दो ब्रांच हैं। पहली संरक्षण औऱ दूसरी सुरक्षा ब्रांच है। संरक्षण शाखा गैर-विशिष्ट व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करती है और सुरक्षा शाखा आमतौर पर श्रेणियों के आधार पर लोगों को सुरक्षा प्रदान करती है जैसे कि द, ध, न, द + आदि। वर्गीकृत व्यक्ति वे हैं जिन्हें राज्य खुफिया विभाग (डखऊ) द्वारा वर्गीकृत किया गया है। मुंबई में स्पेशल प्रोटेक्शन यूनिट (डझण) द्वारा डखऊ श्रेणियों की सुरक्षा का ध्यान रखा जाता है। एसपीयू हमारे नियंत्रण में है, उनके प्रशिक्षण, विशेषज्ञता, उनकी तैनाती इस कार्यालय द्वारा नियंत्रित की जाती है। सुरक्षा का दूसरे वर्ग वे हैं जिन्हें मुंबई शहर की सीमा के अंदर स्थानीय सुरक्षा प्रदान की जाती है। इसलिए उनकी सुरक्षा का ध्यान मुंबई पुलिस की सुरक्षा शाखा द्वारा रखा जाता है। गैर-वर्गीकृत किए गए लोगों की संख्या लगभग 200-300 है और उनके लिए लगभग 430 सुरक्षाकर्मी कार्यरत हैं। एसपीयू की मुंबई में लगभग 85 श्रेणियां हैं, एक्स, वाई, जेड, जेड +। इसके अलावा हम सीएम बंगलो, मंत्रालय और गवर्नर हाउस को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं, इसलिए पूरी सुरक्षा हमारे अधीन है। अन्य सुरक्षा शाखा के तहत सभी महत्वपूर्ण स्थानों की सुरक्षा ऑडिट करने की जिम्मेदारी हमारी है, जिसमें भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, मॉल आदि शामिल हैं। उनकी ऑडिट के बाद हम उऩकी सुरक्षा को लेकर आगे सिफारिश करते हैं। हम सभी दूतावासों, वाणिज्य दूतावासों को भी सुरक्षा प्रदान करते हैं, जैसे कि अमेंडेड स्कूल, चैंबर्स ऑफ कॉमर्स जैसी जगहें हैं। इन सभी स्थानों की हमारे द्वारा सुरक्षा ऑडिट की जाती है और उनकी सुरक्षा के बारे में सिफारिश की जाती है। इसके साथ ही हामरे पास त्वरित कार्रवाई टीम भी है। जैसा कि सबको मालूम है कि मुंबई हमेशा से आतंकवादी और अंडरवर्ल्ड के निशाने पर रहती है। उनसे निपटने और बंधक बनाने जैसी स्थितियों को रोकन के लिए एक उच्च प्रशिक्षित, प्रेरित, युवा, फिट और पूरी तरह से सुसज्जित टीम की आवश्यकता थी। यह टीम सबसे कम समय में कार्रवाई शुरू कर देती है। ये आधुनिक हथियारों से लैस हैं। साथ ही सामरिक जानकारी एकत्र करने और खतरे को बेअसर करने के लिए इनकी टीम कार्रवाई करती है। ये बंधकों को बचाते हैं, केंद्रीय बलों और सरकारी ड्यूटी पर अन्य राज्य बलों को सहायता प्रदान करते हैं। जिम्मेदारी बहुत बड़ी है लेकिन अपने कर्मचारियों और अधिकारियों की मदद से हम सभी स्थिति को आसानी से संभाल लेते हैं।
सवाल : अतिरिक्त आयुक्त पी एंड के रूप में आपकी मुख्य जिम्मेदारी क्या है?
जवाब : अगर कोई व्यक्ति हमसे सुरक्षा की मांग करता है, तो सबसे पहले हमारा प्रयास रहता है कि कि हम उस व्यक्ति के वास्तविक खतरे का मूल्यांकन करें और उसे कम से कम समय में इनपुट के आधार पर सुरक्षा प्रदान करें।
सवाल : आप पूरे पुलवामा प्रकरण को कैसे देखते हैं, क्या यह खुफिया तंत्र और राष्ट्रीय सुरक्षा में भारी चूक थी?
जवाब : मैं वहां की चूक और रणनीति के बारे में नहीं जानता। घटना की पूरी जानकारी नहीं होने के कारण मैं किसी को भी दोषी नहीं ठहरा सकता। लेकिन हम इस घटना से सबक सीख सकते हैं। अर्धसैनिक बलों को ज्यादा जिम्मेदार और सशक्त बनाने की जरुरत है। पुलवामा जैसे हमले को रोकने के लिए हमें सभी आवश्यक सावधानी बरतनी होगी। नागरिकों में जागरूकता फैलाकर इस तरह के खतरे को कम किया जा सकता है, आम लोग किसी भी सुरक्षा उपाय के लिए सबसे महत्वपूर्ण इनपुट होते हैं। पुलिस या सुरक्षा बलों को हर जगह तैनात नहीं किया जा सकता है।
सवाल : शिक्षित और पेशेवर नौजवानों द्वारा आतंकवाद अपनाने का क्या कारण है?
जवाब : कुछ लोग और संगठन दुनिया भर में धर्म के नाम पर लोगों और खासकर नौजवानों के मन में जहर घोलने का काम कर रहे हैं। वे बीमार मानसिकता से ग्रसित हैं और वे अपने स्वार्थ के लिए नौजवानों को बहकाकर गलत रास्ते पर ले जाना चाहते हैं।
सवाल : क्या आपको लगता है कि सिविल सर्विस में किसी तरह की सुधार की तत्काल आवश्यकता है?
जवाब : सबसे पहले, उन्हें ज्यादा जवाबदेह बनाने की आवश्यकता है। दूसरा- उन्हें किसी भी प्रकार की कार्रवाई के लिए अधिक सुरक्षित रहने की आवश्यकता है।
सवाल : अपने विभाग के लिए आपकी सरकार से क्या अपेक्षाएं क्या हैं?
जवाब : मैन पावर बढ़ाना जरुरी है। क्योंकि दिनोंदिन संरक्षण और सुरक्षा की मांग करनेवाले लोगों की संख्या बढ़ती जा रही है। कई लोगों की सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों को लंबे समय तक काम करना पड़ता है। हमें अगर ज्यादा मैन पावर दिया जाए तो उनके काम की क्षमता और गुणवत्ता बढ़ सकती है। अभी तो काम की अधिकता की वजह से वे अपने परिवार को बहुत कम समय दे पाते हैं। अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर सुविधाओं की भी आवश्यकता है, ये सभी प्रस्ताव सरकार के पास भेजे गए हैं और सरकार हर कदम पर हमारे साथ है।
सवाल : 26/11 और पुलवामा हमले के बाद मुंबई पुलिस क्या इस तरह के हालात का का सामना करने की क्षमता रखती है?
जवाब : बिल्कुल, हम ऐसे हमलों का सामना करने में सक्षम और हरदम तैयार रहते हैं।
सवाल : आपका रोल मॉडल कौन है?
जवाब : मैं किसी एक व्यक्ति के बारे में नहीं सोच सकता क्योंकि मैं कई लोगों से मिलता हूं। उनमें से कई लोग हमें किसी न किसी रुप में प्रेरित करते हैं।
सवाल : आपको कौन-सा खेल पसंद है?
जवाब : ज्यादा नहीं खेलता, लेकिन जब भी मुझे समय मिलता है, मैं वॉलीबॉल और टेबल टेनिस खेलना पसंद करता हूं।
सवाल : आप अपना खाली समय कैसे बिताते हैं?
जवाब : मुझे पढ़ना और लिखना बहुत पसंद है।
सवाल : आईपीएस बनने की ख्वाहिश रखने वाले छात्रों को आप क्या सुझाव, सलाह देना चाहते हैं?
जवाब : अपनी प्राथमिकता का चयन काफी सोच-विचारकर करें। सिर्फ लाइम लाइट, सैल्यूट, बंगला आदि से प्रभावित होकर इस सेवा में न आएं। ये सब शुरू में अच्छा लगता है। सिर्फ 5 वर्षों के भीतर ये सब आकर्णष समाप्त हो जाते हैं। इस सेवा में आने के बाद बहुत मेहनत करनी पड़ती है। लोगों को लगता है कि कड़ी मेहनत की आवश्यकता सिर्फ परीक्षा की तैयारी तक होती है। लेकिन एक बार जब आपको किसी भी पद पर प्रभारी बना दिया जाता है तो आपको यह महसूस होता है कि आप पूरे जिले, क्षेत्र या मंडल के लिए अंतिम बिंदु हैं और हर तरह की समस्या से निपटना आपके लिए आसान नहीं होता। पूरे जिले या विभाग के लोगों के साथ ही सरकार की भी आपसे बड़ी अपेक्षाएं होती हैं।
यदि आप सिविल सर्विस में शामिल होना चाहते हैं तो कृपया सार्वजनिक सेवा के उद्देश्य को ध्यान में रखें।
सवाल : सिविल सर्विस सेवा का आपके लिए क्या मतलब है?
जवाब : सिविल सर्वेंट को तमाम तरह के मुसीबतों के बावजूद जनता, समाज औऱ देश हित को सर्वोपरि मानकर काम करना पड़ता है। सरकार के नियम कानून को जनहित में पूरी लगन और ईमानदारी और गुणवत्ता के साथ लागू करना हमारा कर्तव्य है। यह जिम्मेदारी, ईमानदारी और बिना किसी भेदभाव के समाज के कल्याण के लिए काम करने का मजबूत मंच है। सिविल सर्वेंट को आधिकारिक पद या जानकारी के दुरुपयोग से बचना चाहिए।
सवाल : आप अपने विभाग के अधिकारियों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब : हम जनता की सेवा करने के लिए हैं, जिसके लिए हमें अपना 100 प्रतिशत देना है और अगर हम अपना 100 प्रतिशत देते हैं, तो यह हमें बहुत संतुष्टि देता है और हम महसूस करेंगे कि दिन अच्छी तरह से व्यतीत हो रहा है।
सवाल : आप मुंबई के नागरिकों को क्या संदेश देना चाहेंगे?
जवाब : पुलिस का समर्थन करें, क्योंकि हमारी संख्या जरुरत के लिहाज से काफी कम है। इस वजह से हमारे काम में सार्वजनिक भागीदारी आवश्यक है और यदि हमारे किसी अधिकारी द्वारा कुछ भी गलत किया जाता है, तो हमें फौरन उसकी सूचना दें, ताकि उसके खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

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