सुरेखा नारखेड़े के खिलाफ बोईसर पुलिस स्टेशन में ठगी का मामला दर्ज

अपने साथियों के साथ मिलकर षड्यंत्र के तहत फंसाती है बिल्डरों को
सुरेखा के साथ जमीन मालिक वासुदेव पाटिल की भी है पुलिस को तलाश

बोईसर/लखन छड़ीवाल
पालघर जिले की बोईसर पुलिस ने मीरा रोड के नामचीन बिल्डर योगेंद्र हजारी पांडेय की शिकायत पर बारीकी से जांच कर मीरा रोड पूर्व, नित्यानंद नगर स्थित न्यू ओम टॉवर में रहने वाली तथाकथित ठग सुरेखा सुरेश नारखेड़े और बोईसर के जमीन मालिक वासुदेव पाटिल के खिलाफ 420, 427 और 34 के तहत मामला दर्ज किया है। बोईसर के पुलिस निरीक्षक जगताप ने इंडिया अनबाऊंड को बताया कि अभी तक आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
पूरी कहानी, पीड़ित की जुबानी
सुरेखा नारखेड़े की ठगी का शिकार हुए योगेंद्र हजारी पांडेय के मुताबिक, वे अपनी सहयोगी गीता श्रीवास्तव के साथ पिछले 20 वर्षों से मीरा भायंदर और पालघर परिसर में इमारत बनाने के व्यवसाय से जुड़े हैं। वे अपनी शिकायत के बारे में बताते हैं, 2012 में मैं और गीता श्रीवास्तव मीरा रोड के ऑफिस में बैठे थे। उसी समय गीता की एक दोस्त सुरेखा सुरेश नारखेड़े मिलने आई। बातों में बातों में सुरेखा ने मुझे कंस्ट्रक्शन लाइन में मदद करने की विनती की। इसके बाद हमने 2013 में बोईसर में 37 कुंठा जमीन खरीद कर इमारत बनाने का फैसला किया। इसके लिए मैंने और सुरेखा ने विध्नहर्ता सिविल कंस्ट्रक्शन प्रा .ली. नाम से एक कंपनी रजिस्टर कराई और ये तय किया कि इस कंपनी में दोनों का 50% की हिस्सेदारी होगी। विध्नहर्ता सिविल कंस्ट्रक्शन प्रा .ली. में मेरे और सुरेखा के अलावा मेरा बेटा शशिकांत योगेंद्र पांडेय और ललित सुरेश पाटिल भी पार्टनर थे। कंपनी खुलने के बाद हमने मलाड के एक्सिस बैंक में कंपनी का करंट एकाउंट खोला, जिसमे 4 पार्टनरों ने मिलकर 13 लाख 50 हजार रुपए जमा कराए। हमारी कंपनी ने बोईसर के वासुदेव पाटिल से उनकी 37 कुंठा जमीन डेवलप करने के लिए ली और उनके साथ करार किया। करार के मुताबिक, बनने वाली इमारत में उनका और विघ्नहर्ता कंपनी का 45/55 की भागीदारी होगी साथ ही उन्हें जगह के लिए 30 लाख रुपए भी दिए जाएंगे। जगह का करार होने के बाद हमने उक्त जगह पर ऑफिस, इमारत का पिलर सहित दूसरे कामो में कम से कम 50 लाख रुपए और खर्च कर दिए। इसी दौरान बोईसर का इलाका ठाणे ग्रामीण से अलग होकर पालघर जिला बना गया।पालघर जिला बनने के बाद इस परिसर में बनने वाली इमारतों की एफएसएसएआई भी बढ़ गई। बढ़े हुए एफएसएसएआई के मुद्दे को लेकर जमीन का मालिक वासुदेव पाटिल हम से 50 लाख रुपए ब्लैक में मांगने लगा और पैसे ना देने की सूरत में उसने काम बंद करा देने की धमकी दे डाली। इसके बाद हम लोगों ने वासुदेव पाटिल को काफी समझाने की कोशिश की मगर वो नहीं माना और पाटिल ने निर्माण परिसर में अपने साथियों के साथ आकर तोड़फोड़ की तथा हमारा काम बंद करा दिया।इस घटना के बारे में 2 फरवरी 2015 को सुरेखा और ललित ने लिखित शिकायत कर कहा कि वे विघ्नहर्ता कंपनी में योगेंद्र पांडेय के साथ काम नहीं करना चाहते। इस प्रकार मुझे और मेरे बेटे को निलाककर दोनों ने कंपनी का काम शुरू किया। मेरे होश उस समय उड़ गए जब मुझे पता चला कि वासुदेव की जमीन पर दोबारा कंस्ट्रक्शन का काम शुरू हो गया है। जब इस विषय के मैंने वासुदेव पाटिल से 1/10/2018 को फोन कर जानकरी हासिल की तो पाटिल ने बताया कि सुरेखा ने पहले किए गए करार को खत्म कर उनके साथ दोबारा नया करार किया है और पहला करार खत्म करने के लिए योगेंद्र पांडेय द्वारा दिया गया नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट भी दिया है।इसके बाद मैंने 2016 में विध्नहर्ता सिविल कंस्ट्रक्शन प्रा .ली. के साथ नया करार किया है। पाटिल से यह सुनते ही मुझे लगा कि कहीं ना कहीं मुझे एक षड्यंत्र के तहत फंसाया गया है।
नोटिस का जवाब नहीं मिलने के बाद पुलिस में की शिकायत
मैंने जमीन के मालिक वासुदेव पाटिल और अपनी सहयोगी सुरेखा तथा ललित को लीगल नोटीस भेजा कि उन्होंने बिना मुझे बताए पहले तो कंपनी से निकाल दिया उसके बाद मेरा फर्जी एनओसी बना कर उस करार को भी रद्द कर दिया, जो उनकी कंपनी और वासुदेव पाटिल के बीच हुई थी। नोटिस मिलने के बावजूद ना तो वासुदेव पाटिल ने और ना ही सुरेखा या ललित ने कोई जवाब दिया। इसके बाद थक-हार कर मैं अपने साथ हुए ठगी के मामले में न्याय पाने के लिए बोईसर पुलिस में सिकायत की। बोईसर पुलिस स्टेशन के अधिकारियों ने पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए मामले की जांच की और आखिरकार मेरे द्वारा दिए गए साक्ष्यों के आधार पर ठग सुरेखा सुरेश नारखेड़े और जमीन मालिक वासुदेव पाटिल के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 427 और 34 के तहत मामला दर्ज कर गिरफ्तारी के लिए उनकी तलाश में जुट गई है।
कई लोगों से ठगी का मामला उजागर
सुरेखा खिलाफ बोईसर पुलिस स्टेशन में ठगी का मामला दर्ज होने के बाद कई ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं जिसे देख कर लगता है कि सुरेखा ठगी का गोरखधंधा बड़े ही सधे हुए तरीके से संगठित रूप से करती रही है। सूत्रों से ऐसी जानकरी मिली है कि सुरेखा ने अबतक मुंबई के विलेपार्ले, ठाणे ग्रामीण और पालघर जिले में कई लोगों के साथ ठगी की है। इंडिया अनबाऊंड अखबार की ऐसे सभी पीड़ितों से गुजारिश है कि वे खुलकर सुरेखा के काले कारनामों को सामने लाएं वर्ना ये ठग इसी तरह ना जाने कितने ईमानदार और मासूम लोगों को अपने जाल में फंसा कर उन्हें बेखौफ लुटती रहेगी।

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