ऑटोरिक्शा वाले की दादागिरी, ज्यादा भाड़ा न देने पर यात्री को मारी टक्कर

भायंदर/ लखन छेड़ीवाल
मुंबई हो या उसका उपनगर हर जगह इन दिनों ऑटोरिक्शा वालों की दादागिरी आम बात है। ऑटोरिक्शा वाले कानून को ताक पर रख कर यात्रियों से मनमाना भाड़ा वसूल रहे हैं और जब कोई यात्री उनका विरोध करता है, तो ये लोग उसके साथ हाथपाई करने लगते हैं। ऑटो वालों की दादागिरी की सबसे बड़ी वजह आरटीओ और निकम्मी ट्राफिक पुलिस है, जो हफ्ता खाने के चक्कर में सबकुछ जानते हुए भी अपनी आंखें बंद कर बैठी है।
सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक मुंबई और उसके उपनगरों में लाखों की तादाद बिना परमिट के फर्जी ऑटोरिक्शा खुले आम चल रहे हैं। उनसे ट्रैफिक विभाग के कर्मचारियों और अधिकारियों को हर महीने लाखों की कमाई हो रही है। ट्रैफिक पुलिस की मिलीभगत से चलने वाले ऑटो रिक्शा के चालक दिनदहाड़े कानून को ताक पर रख कर नागरिकों से अपने मन मुताबिक किराया वसूल रहे हैं। ऐसे ही एक ऑटो चालक का शिकार समाज सेवक और पत्रकार हृदय सिंह हुए हैं। हृदय सिंह की माने तो 15 नवंबर को शाम 5 बजकर 40 मिनट पर उन्होंने कांदीवली के ठाकुर कॉलेज से महिंद्रा सिग्नल जाने के लिए शेयर रिक्शा पकड़ी। जब हृदय सिंह महिंद्रा सिग्नल के पास ऑटो से उतरे और ऑटो वाले को 12 रुपए भाड़े के दिए तो ऑटो चालक ने 2 रुपए और भाड़े के मांगे। जब हृदय सिंह ने उन्हें यह कहा कि तय भाड़े के हिसाब से 12 रुपए ही होते हैं, तो ऑटो चालक भड़क गया और उसने कहा कि हमलोगों ने भाड़ा बढ़ा दिया है। भाड़ा बढ़ाए जाने की बात सुनकर जब हृदय सिंह ने ऑटो चालक से भाड़ा बढ़ाए जाने का जीआर या दस्तावेज मांगे तो ऑटो चालक ने गुस्से में ऑटो हृदय सिंह पर चढ़ाने की कोशिश की। अपनी तरफ ऑटो को आता देख हृदय सिंह ने खुद को बचाने की कोशिश की। इस दौरान वे जमीन पर गिर पड़े और जख्मी हो गए। ऑटो चालक द्वारा की गई ज्यादती के बाद हृदय सिंह ने समता नगर पुलिस स्टेशन में जाकर ऑटो क्रमांक एमएच-47 एक्स-3262 के चालक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। समता नगर पुलिस ने हृदय सिंह की शिकायत पर ऑटो नंबर एमएच-47 एक्स-3262 के चालक के खिलाफ हिट एंड रन का मामला दर्ज कर उसकी तलाश में शुरु कर दी है।

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