मुंबई पुलिस आयुक्त और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो के पदों पर नई नियुक्ति में वरिष्ठता को नजर अंदाज करने का आरोप

कई वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नाराज

मुंबई/ संतोष नाईक
हाल ही में आईपीएस संजय बर्वे को मुंबई पुलिस आयुक्त बनाया गया है, जबकि सुबोध जायसवाल को महाराष्ट्र राज्य का पुलिस महानिदेशक नियुक्त किया गया है। उन्हें 28 फरवरी को तत्कालीन पुलिस महानिदेशक दत्तात्रेय पडसलगीकर के रिटायरमेंट के बाद यह पदभार सौंपा गया है। राज्य के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (कानून-व्यवस्था) परमबीर सिंह को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) का महानिदेशक बनाया गया है। अब तक एसीबी प्रमुख रहे संजय बर्वे को मुंबई पुलिस आयुक्त बनाए जाने से यह पद रिक्त हुआ था। इसके पहले परमबीर सिंह को जुलाई 2018 में ठाणे पुलिस आयुक्त के पद से महाराष्ट्र पुलिस मुख्यालय भेजा गया था।
बताया जा रहा है कि इन पदों पर नियुक्ति में पुलिस अधिकारियों (आईपीएस) की वरिष्ठता का ख्याल नहीं रखा गया है। कई पुलिस अधिकारी सरकार के इस निर्णय से नाराज हैं। हालांकि किसी ने अभी तक इस बारे में खुलकर अपनी नाराजगी नहीं जताई है, लेकिन अगर वरिष्ठता के क्रम को देखा जाए तो स्पष्ट होता है कि इन नियुक्तियों में नियम का उल्लंघन हुआ है। जहां तक सुबोध जायसवाल को डीजीपी बनाए जाने का सवाल है तो वे 1985 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। इस लिहाज से उनको राज्य का पुलिस महानिदेशक बनाना बिलकुल उचित है। लेकिन 1987 बैच के आईपीएस संजय बर्वे और 1988 बैच के परमबीर सिंह को एसीबी चीफ बनाने को लेकर सवाल खड़े किए जा रहे हैं। दरअस्ल मुंबई के पुलिस कमिश्‍नर के बाद एसीबी के पोस्ट को नंबर दो का पोस्ट माना जाता है। इन दोनों पदों पर की गई नई नियुक्ति में वरिष्ठता के साथ ही कोर्ट अफिडेविट को भी नजरअंदाज करने का आरोप लगाया जा रहा है। आईपीएस अधिकारियों के वरिष्ठता के क्रम पर हम अगर नजर डालें तो संजय पांडे (बैच 1986), बिपिन बिहारी (बैच 1987), डी कनकथमन (बैच 1987) और हेमंत नगराले (1987) को मुंबई पुलिस आयुक्त के साथ नंबर दो के पोस्ट एसीबी मानिदेशक परमबीर सिंह (बैच 1988) को बनाये जाने में वरिष्ठता को नजअंदाज किया गया है। सच तो यह है कि इनमें वरिष्ठता में संजय पांडे का नाम सबसे पहले आता है लेकिन उन्हें मुंबई पुलिस आयुक्त तो छोड़िए नंबर दो के पोस्ट एसीबी महानिदेशक भी नहीं बनाया गया। उन्हें अपने वर्तमान पद होमगार्ड व नागरी संरक्षण पुलिस महानिदेशक के पद पर ही बरकरार रखा गया है।

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