देश की एक मांग खत्म हो आतंकिस्तान

  • 41 जवानों की शहादत के बाद सुलग उठा हिंदुस्तान
  • सभी राजनीतिक पार्टियों ने एक स्वर में कहा, खत्म हो आतंकवाद
  • एनआईए ने 7 लोगों को लिया हिरासत में, पूछताछ जारी

नई दिल्ली/ नित्यानंद पांडेय
जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में सुरक्षा बलों को निशाना बनाए जाने की कायराना हरकत पर पूरे देश में गम और गुस्से की लहर फैली हुई है। सरकार ने भी इस नापाक हरकत के बाद तीन तरह से पाकिस्तान को करारा जवाब देने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पाकिस्तान को चेतावनी देते हुए कहा, ‘वह ऐसे हमलों से भारत को कमजोर नहीं कर पाएगा और इसके गुनहगारों को बहुत बड़ी कीमत चुकानी होगी। सुरक्षाबलों को आगे की कार्रवाई, समय, स्थान और स्वरूप तय करने की पूरी आजादी सेना को दे दी गई है।’ इसके अलावा, पाकिस्तान को कारोबार के लिए दिया गया मोस्ट फेवरेड नेशन (एमएफएन) का दर्जा तुरंत प्रभाव से वापस ले लिया गया है साथ ही देश की सेना को यह आजदी दे गई कि वो अपने हिसाब से अब आतंकवादियों और उनके आकाओं से निपट सकती है। आतंकवादी संगठनों को पनाह और बढ़ावा दे रहे पड़ोसी देश को दुनिया भर में अलग-थलग करने की कोशिशें तेज करने का भी फैसला किया गया है। संकट की, इस घड़ी में समूचा विपक्ष सरकार, सेना और अपने जवानों के साथ खड़ा है तो वहीं दूसरी तरफ समूचे देश में नागरिकों के बीच भारी आक्रोश देखने को मिला। कहीं नागरिकों ने पाकिस्तान के झंडे और आतंक के आकाओं के पुतले जला कर अपना रोष व्यक्त किया तो वहीं मुंबई से सटे भायंदर और नालासोपारा में नाराज यात्रियों ने घंटों लोकल ट्रेन रोक कर पाकिस्तान के खिलाफ नारेबाजी की। एक समय तो ऐसा आया जब रेलवे पुलिस को आंदोलन कर रहे यात्रियों को हटाने के लिए हल्के बल का प्रयोग भी करना पड़ा। जहां एक तरफ कई जगह नागरिकों में पुलवामा हमले को लेकर भारी नाराजगी देखी गई तो वहीं देश के हर गली ,चौराहे और प्रांगण में देश के नागरिकों ने अपने 41 शहीद वीर जवानों को नम आंखों से श्रद्धांजलि दी। पुलवामा में सीआरपीएफ के काफिले की बस से विस्फोटक लदी कार भिड़ाकर किए गए हमले में 41 जवान शहीद हुए थे। इस हमले की जिम्मेदारी जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। इस हमले के बाद देर शाम से कई दौर की बैठकें हुईं। सुरक्षा मामलों पर कैबिनेट की बैठक में तमाम विकल्पों पर चर्चा की गई। गृह मंत्रालय से कहा गया है कि पुलवामा अटैक के पीछे किस तरह की रणनीतिक और खुफिया चूक हुई, इसका पता लगाकर सुरक्षा व्यवस्था को नए सिरे से पुख्ता किया जाए। पुलवामा हमले के बाद देश में गम और गुस्से की लहर है। हर किसी के मन में है कि इस कायराना हमले का ऐसा मुंहतोड़ जवाब दिया जाए कि फिर कभी किसी की ऐसी नापाक हरकत करने की हि

म्मत न हो। पुलवामा अटैक की जांच के लिए राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम और नेशनल सिक्यॉरिटी गार्ड (एनएसजी) की आतंक विरोधी कमांडो फोर्स ब्लास्ट वाली जगह लेथपोरा पहुंच गई। सूत्रों से मिली जानकरी के मुताबिक एनआईए के पहुंचने के बाद से सात लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ चल रही है। जांच एजेंसियों को पता लगा है कि हमले की पूरी साजिश पाकिस्तानी नागरिक कामरान ने की थी, जो जैश से जुड़ा है। यह आतंकी दक्षिणी कश्मीर के पुलवामा, अवंतीपुरा और त्राल में आता-जाता रहा है। हमले की साजिश त्राल के ही मिदूरा इलाके में तैयार की गई थी। पुलिस अब जैश के ही एक और आतंकी की तलाश में है, जिसने विस्फोटक का इंतजाम किया था।
अधिकारियों के मुताबिक हमले में 80 किलोग्राम हाई ग्रेड आरडीएक्स का इस्तेमाल हुआ था। जांच स्थल पर अब भी उन तीन सैनिकों के शवों की तलाश की जा रही है, जिनका कुछ अता-पता नहीं लग पाया है।
पुलवामा हमले में शहीद हुए 41 जवानों के पार्थिव शरीर श्रीनगर से एयरफोर्स के विमान के जरिए पालम एयरपोर्ट पर लाए गए। भारत माता के इन सपूतों को पीएम नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, निर्मला सीतारमण, राहुल गांधी, अरविंद केजरीवाल, राजवर्धन सिंह राठौड़ समेत कई नेताओं ने श्रद्धांजलि दी। पीएम ने इस दौरान शहीदों के शवों की परिक्रमा की। पुलवामा हमले के बाद केंद्र सरकार ने शनिवार को सर्वदलीय बैठक बुला कर सभी पार्टी के नेताओ से आगे की रणनीति पर चर्चा की। सर्वदलीय बैठक खत्म होने के बाद सभी राजनीतिक पार्टियों के नेताओ ने एक स्वर में यही कहा कि सरकार, सेना जो भी कदम उठाएगी वे लोग उसके साथ खड़े है। वहीं, कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा है कि ऐसे समय में हमारी पार्टी और पूरा विपक्ष सरकार और अपने सुरक्षाबलों के साथ खड़ा है। भारत सरकार ने पाकिस्तान को 1996 में दिया मोस्ट फेवरेड नेशन (एमएफएन) का दर्जा वापस ले लिया है। सरकार के इस कदम के बाद पाकिस्तानी वस्तुओं पर सीमा शुल्क बढ़ाने, बंदरगाह से जुड़े प्रतिबंध लगाने और वहां से आने वाली कुछ वस्तुओं पर बैन जैसे कदम उठाए जा सकते हैं। इसके अलावा विदेश मंत्रालय और दूसरी एजेंसियां कूटनीतिक तौर पर दुनिया में पाकिस्तान को घेरेंगे और आतंकवाद के खिलाफ कदम उठाने के लिए मजबूर करेंगे। भारत सरकार सात दिन के अंदर पुलवामा अटैक में पाकिस्तान के शामिल होने के सबूत सभी देशों से साझा करेगी। 2016 में उरी अटैक के बाद ऐसे ही सबूत देकर भारत ने सर्जिकल स्ट्राइक की थी, जिस पर भारत को बहुत सपोर्ट मिला था।

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